SHANI STOTRA दशरथकृत शनि स्तोत्र

SHANI STOTRA दशरथकृत शनि स्तोत्र

SHANI STOTRA दशरथकृत शनि स्तोत्र
Shani Stotra

Shani Stotra - Dashrath Shani Stotra: जो भी भक्त शनि ग्रह, शनि साढ़ेसाती, शनि ढैया या फिर शनि की महादशा से पीड़ित हैं उनको दशरथकृत श्री शनि स्तोत्र का नियमपूर्वक प्रतिदिन पाठ करना चाहिए.  इस पाठ को प्रतिदिन करने से भगवान श्री शनि देव प्रसन्न होते हैं तथा जीवन को समस्त परेशानियों से मुक्ति दिलाकर जीवन को सुखमय और मंगलमय बनाते हैं तो आइये इस पाठ को करें.

Shani Stotra - Dashrath Shani Stotra



नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण निभाय च |
नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः ||

नमो निर्मांस देहाय दिर्घश्मश्रुजटाय च |
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ||

नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नमः |
नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ||

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्नरीक्ष्याय वै नमः |
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने ||

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते |
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ||

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवतर्क नमोऽस्तु ते |
नमी मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिंशाय नमोऽस्तु ते ||

तपसा दग्ध-देहाय नित्यं योगरताय च |
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः ||

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज-सूनवे |
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ||

देवासुरमनुष्याश्च सिद्ध-विद्याधरोरागा: |
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशं यान्ति समुलतः ||

प्रसाद कुरु मे सौरे ! वारदो भव भास्करे |
एवं स्तुतस्तदा सौरिर्ग्रहराजो महाबल: ||


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