श्री कृष्णा आखिर माखन ही क्यों चुराते थे गोपियों की इस शिकायत के पीछे छिपी है कान्हा की सबसे प्यारी लीला



जब भी बाल श्री कृष्ण का स्मरण होता है मन में उनकी नटखट मुस्कान हाथ में मकान और सर पर मोरपंखी छवि उभर आती है। कृष्ण की बाल लीलाओं में माखन चोरी का प्रसंग सबसे ज्यादा लोकप्रिय माना जाता है।लेकिन सवाल यह है कि आखिर नंदलाल को माखन इतना पसंद क्यों था?

Shri Krishna bal katha

गोकुल की गलियों में गूंजती थी कान्हा की शरारत

गोकुल में बालकृष्ण का बचपन बेहद चंचलता और प्रेम से भरा था माता यशोदा घर में मक्खन तैयार करके रखती थी लेकिन कान्हा की नजर उसे मटकी पर पढ़ते ही उनकी शरारत शुरू हो जाती थी

कभी भी वह अकेले माखन तक पहुंचाने की कोशिश करते, तो कभी अपनी शाखों की टोली बना लेते। अगर मटकी ऊंचाई पर लटका हो तो कृष्ण और उनके मित्र एक दूसरे का सहारा लेकर वहां तक पहुंच जाते और मक्खन निकालकर मिल बाटकर खाते। यह प्रसंग कृष्ण की प्रसिद्ध बाल लीलाओं से जुड़ा है।

जब गोपियों ने पकड़ ली कान्हा की चोरी

धीरे-धीरे गोकुल की गोपियों को समझ आने लगा कि उनकी मटकी से मकान को कौन गायब करता है। कृष्ण कभी माखन खाकर भाग जाते तो कभी मटकी ही गिरा देते।

आखिर का परेशान गोपियों अपनी शिकायत लेकर माता यशोदा के पास पहुंचने लगी। वे बताती की नंदलाल उनके घर आते हैं माखन खाते हैं और अपने दोस्तों को भी खिलते हैं।

लेकिन कान्हा अभी काम चतुर नहीं थे। यशोदा मैया जब उनसे सवाल करती, तो बालकृष्ण अपनी मासूम बातों और भोले अंदाज से ऐसा जवाब देते की मां का गुस्सा भी ज्यादा देर टिक नहीं पाता।

माखन ही क्यों बना कान्हा की पसंद?

पौराणिक परंपराओं में माखन को कृष्ण के प्रिया भोगों में माना जाता है ब्रज के घरों में दूध और दही से ताजा माखन तैयार किया जाता था और बालकृष्ण को इसका स्वाद बेहद प्रिय बताया जाता है इसी प्रसिद्ध लीला के कारण उन्हें प्रेम से माखन चोर और माखन चोर नंदलाल भी कहा जाता है

शरारत में छिपा था अपार अपनापन

कृष्ण की माखन चोरी की कथा केवल एक बाल शर्त के रूप में ही याद नहीं की जाती। गोपियों की शिकायतों में भी कृष्ण के प्रति नाराजगी से ज्यादा स्नेहा दिखाई देता है। यही वजह है कि सदियों बाद भी उनकी यह बाल लीला जन्माष्टमी के अवसर पर भक्तों को आकर्षित करती है और बाल गोपाल के साथ माखन-मिश्री के भोग की परंपरा से जुड़ी हुई है।


Share on:

Leave a Comment